how iscon temple started
आईएसकॉन मंदिर की स्थापना:
1965 में, श्रील प्रभुपाद ने अमेरिका में भगवान कृष्ण की शिक्षाओं को फैलाने के लिए आईएसकॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) की स्थापना की।
प्रभुपाद का जीवन:
श्रील प्रभुपाद का जन्म 1896 में कोलकाता में हुआ था। वह एक गरीब परिवार से थे, लेकिन उन्होंने भगवान कृष्ण की शिक्षाओं में गहरी रुचि दिखाई।
1918 में, प्रभुपाद ने अपने गुरु, श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर से दीक्षा ली।
1944 में, प्रभुपाद ने अपनी पत्रिका, "बैक टू गॉडहेड" शुरू की।
1950 के दशक में, प्रभुपाद ने वृंदावन में एक आश्रम स्थापित किया।
1965 में, प्रभुपाद ने अमेरिका में आईएसकॉन की स्थापना की।
पहला आईएसकॉन मंदिर:
पहला आईएसकॉन मंदिर 1966 में न्यूयॉर्क में स्थापित किया गया था।
इसके बाद, आईएसकॉन मंदिर विश्वभर में फैल गए।
आज, आईएसकॉन मंदिर 100 से अधिक देशों में हैं।
आईएसकॉन मंदिर की उद्देश्य:
आईएसकॉन मंदिर का उद्देश्य भगवान कृष्ण की शिक्षाओं को विश्वभर में फैलाना है।
इसके अलावा, आईएसकॉन मंदिर समाज सेवा, शिक्षा, और संस्कृति के कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।
निष्कर्ष:
आईएसकॉन मंदिर की स्थापना श्रील प्रभुपाद की दृष्टि और समर्पण का परिणाम है। आज, आईएसकॉन मंदिर विश्वभर में भगवान कृष्ण की शिक्षाओं को फैला रहे हैं।
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